विधना तेरे लेख किसी की समज न आते है भजन लिरिक्स| Vidhna Tere Lekh Kisi Ki Samj Na Aate Hai Bhajan Lyrics

विधना तेरे लेख किसी की समज न आते है  भजन लिरिक्स|
 Vidhna Tere Lekh Kisi  Ki Samj Na Aate Hai Bhajan Lyrics


विधना तेरे लेख किसी की समज न आते है,
जन जन के प्रिये राम लखन सिया वन को जाते है,


एक राजा के राज दुलारे वन वन फिरते मारे मारे,
भुनी हो कर रहे कर्म कति डरे नहीं काहू के टारे,
सबके कष्ट मिटाने वाले कष्ट उठा ते है,
जन जन के प्रिये राम लखन सिया वन को जाते है,



पग से बहे लहू की धारा हरी चरणों से गंगा जैसे ,
संकट सहज भाव से सहजे और मुकाते है,
जन जन के प्रिये राम लखन सिया वन को जाते है,




विधना तेरे लेख किसी की समज न आते है  भजन लिरिक्स| Vidhna Tere Lekh Kisi  Ki Samj Na Aate Hai Bhajan Lyrics
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